TET For Primary Teacher: टीईटी को लेकर लंबे समय से प्राथमिक शिक्षकों में आज असमंजस्य की स्थिति बनी हुई थी। हर राज्य में अलग नियम होने के कारण शिक्षक यह नहीं समझ पा रहे थे कि टीईटी देना जरूरी है या नहीं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब केंद्र सरकार के निर्देशों से अब यह स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है कि कोर्ट के फैसले के बाद सभी राज्यों को एक समान दिशा में नियम लागू करने के संकेत मिल गए हैं।
सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट के आदेश से वरिष्ठ शिक्षकों को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन प्राथमिक शिक्षकों के रिटायर होने में अभी 5 साल से भी कम समय बचा हुआ है उन्हें सेवा में बने रहने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य नहीं है। ऐसे शिक्षक बिना टीईटी पास किया भी अपनी सेवा पूरी कर सकते हैं। इस फैसले से उन शिक्षकों को भी बड़ी राहत मिली है जो अपने नौकरी के अंतिम पड़ाव में है और टीईटी को लेकर बहुत ही परेशान थे।
प्रमोशन के लिए जरूरी टीईटी
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है की सेवा में बने रहने के लिए भले ही वरिष्ठ अध्यापकों को छूट दी गई है लेकिन यदि कोई शिक्षक पदोन्नति पाना चाहता है तो उसे टेट पास करना अनिवार्य होगा। बिना टीईटी के प्रमोशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह नियम सभी राज्यों को समान रूप से मनाना होगा।
5 साल से अधिक सेवा वाले शिक्षकों के लिए कोर्ट के सख्त नियम
जिन अध्यापकों के रिटायरमेंट में अभी 5 साल से भी अधिक का समय बचा हुआ है। उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य किया गया है। ऐसे सभी शिक्षकों को 2 साल के अंदर टेट पास करना अनिवार्य होगा यदि बे समय पर टीईटी पास नहीं करते हैं तो संबंधित शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी हालांकि उन्हें सेवा से जुड़े सभी लाभ मिलेंगे।
नई नियुक्तियों मे टीईटी होगी अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में होने वाली सभी नई प्राथमिक शिक्षक नियुक्तियों मे टीईटी को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। अब बिना टीईटी पास किया किसी भी अभ्यर्थी की नियुक्ति नहीं की जाएगी। इससे शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने करने के लिए लागू किया गया है कोर्ट के अनुसार इस नियम में किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।
केंद्र सरकार ने दिए राज्यों को विवरण देने के निर्देश
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दे दिए हैं कि वह अपने चयन प्रक्रिया नियमों को एनसीटीई के मनको और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार संशोधित करें और राज्यों से यह भी कहा गया है कि वे 8 जनवरी 2026 तक प्रभावित शिक्षकों का पूरा विवरण भेजें और 16 जनवरी तक अपनी कानूनी राय और सुझाव केंद्र सरकार को दें। इसके बाद ही आगे की नीति तय होगी।
शिक्षकों को राहत और शक्ति दोनों एक साथ
यह स्पष्ट करना कि प्राइमरी टीचर के लिए टीईटी को पूरी तरह से खत्म नहीं किया गया है जरूरी है। क्योंकि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के विपरीत टीईटी अभी नई नियुक्तियों और प्रमोशन के लिए अनिवार्य है कोर्ट का यह आदेश केवल वरिष्ठ और अनुभवी शिक्षकों को राहत देने के उद्देश्य से ही लिया गया है सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक और जहां वरिष्ठ शिक्षकों को राहत मिली है वहीं दूसरी तरफ भविष्य की नियुक्तियों मे टीईटी को अनिवार्य किया गया है लेकिन अभी भी सभी की नजर राज्य सरकारों के अगले फसलों पर रिटायरमेंट रूल्स में होने वाले बदलावों पर ही टिकी हुई है की अब राज्य सरकारे क्या फैसला लेंगी।


